शिरसगाव ग्रामपंचायत तर्फे सहर्ष स्वागत
                                         तालुका – खानापूर, जिल्हा – सांगली.

ग्रामपंचायत योजना

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का मुख्य उद्देश्य निम्नानुसार है।


क) ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जीवन स्तर में सुधार करना।
ख) देश में सभी ग्राम पंचायतों द्वारा स्वच्छ स्थिति प्राप्त करने के साथ 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वच्छता कवरेज में तेजी लाना।
ग) जागरूकता सृजन और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से स्थायी स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ावा देने वाले समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहित करना।
घ) पारिस्थितिकीय रूप से सुरक्षित और स्थायी स्वच्छता के लिए किफायती तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
ङ) ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण स्वच्छता के लिए ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हुए, समुदाय प्रबंधित पर्यावरणीय स्वच्छता पद्धति विकसित करना।
उद्देश्य:-
योजना का उद्देश्य पंचायतों एवं ग्राम सभा की क्षमता व प्रभावशीलता में अभिवृद्धि पंचायतों में आम-आदमी की भागीदारी की प्रोन्नति, पंचायतों को लोकतांत्रिक रूप से निर्णय लेने एवं उत्तरदायित्व निभाने हेतु सक्षम बनाना, जानकारी एवं पंचायतों की क्षमतावृद्धि हेतु पंचायतों के संस्थागत ढांचे को मजबूत करना, 73वां संविधान संशोधन (।तजपबसम.243) की भावना के अनुरूप अधिकारों एवं उत्तरदायित्वों का पंचायतों को सुपुर्दगी, पंचायती राज व्यवस्था के अन्तर्गत जन सहभागिता, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने हेतु ग्राम सभाओं का सुदृढ़ीकरण तथा संवैधानिक व्यवस्था के पंचायतों को सशक्त रूप देना है।

विस्तार-
यह योजना देश के सभी राज्यों एवं संघशासित क्षेत्रों में चलाई जायेगी। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान / राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण योजना के अन्तर्गत दिये गये मार्ग-निर्देशों के अनुसार उक्त योजना में उल्लिखित विभिन्न कार्यों में से राज्य सरकार अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्रथम वर्ष के लिए वार्षिक कार्ययोजना तथा 12वीं पंचवर्षीय योजना काल हेतु दीर्घयोजना (च्मतेचमबजपअम च्संद) बनायेगी। राज्य निर्वाचन आयोग एवं राज्य वित्त आयोग भी अपनी योजना बनाकर पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार को प्रस्तुत कर सकेगी, जिन पर राज्य सरकार के परामर्श से विचार किया जा सकेगा।
उद्देश्य:
1. पंचायतों को जवाबदेह संस्था के रूप में विकसित किये जाने हेतु प्रोत्साहित किया जाना।
2. पंचायतों को अधिनियम व नियम के अनुसार कार्यवाही करने हेतु प्रोत्साहित किया जाना।
3. उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों को पुरूष्कृत किया जाना।
पंचायत सशक्तीकरण एवं उत्तरदायित्व प्रोत्साहन योजना
पंचायत सशक्तीकरण एवं उत्तरदायित्व प्रोत्साहन योजना, पंचायत को स्वयं को सौंपे गये दायित्वों के अनुसार कृत्यशीलता की ओर अग्रसर करने हेतु एक कारगर माध्यम है। पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित उक्त योजना प्रदेश में वर्ष 2011-12 से लागू है। वर्ष 2013-14 से उक्त योजना को राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान में संविलीन कर दिया गया है।
प्रदेश में वर्ष 2011-12 तथा 2012-13 में निश्चित मानकों के आधार पर क्रमशः वर्ष 2010-11 तथा वर्ष 2011-12 में सर्वोत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायतों से प्राप्त सूचनाओं एवं उनके सत्यापन के आधार पर प्रत्येक वर्ष 26 ग्राम पंचायतों, 4 क्षेत्र पंचायतों एवं 2 जिला पंचायतों को चयनित किया गया था। इन पंचायतों के प्रतिनिधि के रूप में उनके प्रधान/प्रमुख तथा अध्यक्षों को भारत सरकार के स्तर पर 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया था। उक्त योजना के अन्तर्गत पुरस्कृत की जाने वाली पंचायतों को वर्ष 2011-12 के सापेक्ष प्रशस्ति पत्र के साथ-साथ प्रति ग्राम पंचायत रू. 7 लाख, क्षेत्र पंचायत रू. 15 लाख तथा जिला पंचायत रू. 25 लाख की धनराशि से पुरस्कृत किया गया था। वर्ष 2012-13 में इस पुरस्कार की धनराशि को बढ़ाकर ग्राम पंचायत के लिए रू. 9 लाख, क्षेत्र पंचायत के लिए रू. 20 लाख तथा जिला पंचायत के लिए रू. 40 लाख कर दिया गया।

गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सर्वोत्कृष्ट पंचायतों को पुरस्कृत करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत सशक्तीकरण एवं उत्तरदायित्व प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया है। योजनान्तर्गत चयन की पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अन्तर्गत चयनित सर्वोत्कृष्ट 02 जिला पंचायतों, 04 क्षेत्र पंचायतों तथा 26 ग्राम पंचायतों को चयन कर पुरस्कृत किया जायेगा।
ग्रामीण अन्त्येष्टि स्थल का निर्माणः- वित्तीय वर्ष 2014-15 में अनुदान संख्या-14 आयोजनागत योजनान्तर्गत रू0-100.00 करोड़ का आय-व्ययक प्राविधान किया गया था, जिसके सापेक्ष प्रति ग्रामीण अन्त्येष्टि स्थल निर्माण हेतु रू0-13.23 लाख की प्रति दर से प्रदेश के समस्त जनपदों को 755 ग्रामीण अन्त्येष्टि स्थल निर्माण हेतु धनराशि का आवंटन किया जा चुका है, जिसके सापेक्ष रू0-4456.52 लाख की धनराशि का व्यय हो चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में अनुदान संख्या-14 आयोजनागत योजनान्तर्गत रू0-100.00 करोड़ का आय-व्ययक प्राविधान किया गया था, जिसके सापेक्ष प्रति ग्रामीण अन्त्येष्टि स्थल निर्माण हेतु रू0-13.23 लाख की प्रति दर से प्रदेश के समस्त जनपदों को 755 ग्रामीण अन्त्येष्टि स्थल निर्माण हेतु धनराशि का आवंटन किया जा चुका है, जिसके सापेक्ष रू0-1023.77 लाख की धनराशि का व्यय हो चुकी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा देने, उन्हें आय के निजी स्त्रोत प्रदान करने एंव ग्रामीण अर्थ एवं बेरोजगारी की स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण आदि के उद्देश्य से पंचायती राज विभाग द्वारा प्रदेश की गांव पंचायतों के निजी प्रयत्नों से पंचायत उद्योगों का एक मौलिक एंव देश में अपने ढंग का अग्रणी कार्य क्रम क्रि यान्वित किया जा रहा है।
प्रदेश में पंचायत उद्योगों की अग्रगामी योजना का सूत्रपात वर्ष 1961 में चिनहट पंचायत उद्योग, लखनऊ की स्थापना से पचंायत राज अधिनियम 1947 की धारा 30 की व्यवस्थाओं के अन्तर्गत किए गये प्राविघानों के अनुसार दो या दो से अधिक ग्राम पंचायतों के एक लिखित विलेख द्वारा स्थापित करके किया गया था। वर्तमान में प्रदेश में 805 पंचायत उद्योग कार्य कर रहे हैं। जनपदवार पंचायत उद्योगों की संख्या परिशिष्ट-8 पर संलग्न है।
पंचायत उद्योगों के उत्पादन कार्य को आगे बढानें की दृष्टि से प्रदेश के प्रत्येक जनपद-मुख्यालय पर केन्द्रीय प्रिंटिग प्रेस की स्थापना का निर्णय लिया गया। वर्त मान में प्रदेश के 43 जनपदों में 46 प्रिंटिग प्रेस स्थापित हंै। जनपदवार प्रिन्टिग पे्रसों की स्थिति परिशिष्ट-9 पर संलग्न है।
पंचायत उधोगो में किये जाने वाले कार्य
इन उद्योगों द्वारा लकड़ी तथा स्टील के फर्नीचर जैसे - कुर्सी, मेज, आलमारी, रैक, बुक-केसेज, टावल स्टैण्ड, तख्त, डेस्क, ब्लैक बोर्ड, पलंग, चकला, बेलन, खिड़की, चारपाई के पाये, सोफा सेट, नाव, बैलगाड़ी, डनलप गाडी की बाडी, शौचालय सेट, हयूम पाइप, नांद, सीमेंट की नाली, वाशबेसिन, सीमेन्ट के ब्लाक, कुदाल, खुरपा, फावड़ा, बाल्टी, पावर थे्रशर, हंगडा तथा अन्य विभिन्न प्रकार के सामान, हजारा ग्रेनविन, आलमारी रैक, फ्रुटसेफ, पानी की टंकी, टब आदि बनाने का कार्य सम्पन्न हो रहा है। इसके अतिरिक्त थैले, टाटपट्टी, पैकिंग, केसेज, चक्की आटा पत्थर, टोकरी, रिगांल की चटाई, पत्थर की स्लेट व सीमेन्ट के चैके, कोल्हू, तेल की धानी, जूते चप्पल, बुग्गी, साबुन, फाइल कवर, निवाड़, छपाई के लिए प्रिटिंग प्रेस, लकड़ी के खिलौने, बेसिक पाठशालाओं में प्रयोग आने वाला समस्त साज-सज्जा का सामान आदि का उत्पादन किया जाता है।
पंचायत उद्योगों द्वारा वर्ष 1961-62 से पंचायत राज अधिनियम के अन्तर्गत संयुक्त समितिया स्थापित करके कारोबार प्रारम्भ किया और उत्तरोत्तर उनके कारोबार में वृद्धि होती गयी। वर्ष 1976 में पंचायत उद्योगों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के आदेश संख्या - 5038 ग/33-371-74 दिनांक 16 जुलाई, 1976 के अंतर्गत पंचायत उद्योग द्वारा निर्मित वस्तुओं को समस्त सरकारी विभागों एवं अर्द्धसरकारी विभागों को पंचायत उद्योगों से सामान क्रय करने के लिए टेण्डर या कोटेशन आदि मांगने से अवमुक्त करते हुए निर्देश जारी किये गए हैं।
शासन ने पंचायत उद्योगों द्वारा उत्पादित सामान की बिक्री के लिए टेण्डर कोटेशन से छूट प्रदान करते हुए यह स्पष्ट आदेश दिए हैं कि प्र देश के समस्त विभागों, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय निकायों, निगमों और बेसिक शिक्षा संस्थाओं आदि द्वारा अपनी साज-सज्जा आदि की सामग्री इन पंचायत उद्योगों से ही क्रय की जाये।
73वें संविधान संशोधन के पश्चात् प्रदेश में नयी त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई, जिसमें प्रत्येक स्तर की पंचायत की भूमिका और उनके दायित्व स्पष्ट हैं। विकेन्द्रित नियोजन प्रक्रिया में जनसहभागिता एवं विकास कार्यक्रमों/योजनाओं से सम्बन्धित चयन, क्रियान्वयन तथा निगरानी का दायित्व भी पंचायती राज संस्थाओं को दिया गया है। निर्वाचन के पश्चात् त्रिस्तरीय पंचायत की महत्वपूर्ण आवश्यकता है कि नवनिर्वाचित त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों के साथ-साथ उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जाये। तभी एक प्रभावी स्थानीय स्वशासन की स्थापना करने में सफलता प्राप्त हो सकेगी। भारत सरकार तथा प्रदेश सरकार का यह अनवरत प्रयास रहा है कि प्रत्येक योजनाओं के सफल क्रियान्वयन हेतु क्रियान्वयन से पूर्व सम्बन्धित प्रतिनिधियों/कर्मचारियों का क्षमता विकास किया जाना आवश्यक है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु शासनादेश संख्याः- 781/33-3-2016-158/2015 दिनांक 18 मार्च, 2016 के द्वारा पंचायती राज विभाग के अन्तर्गत राज्य स्तरीय पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान 'प्रिट' स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह संस्थान वर्तमान में प्लाट नं0-6, सेक्टर-ई, अलीगंज, लोहिया भवन, लखनऊ
अतः सभी स्तर के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जाना वांछित है। इस हेतु पंचायती राज विभाग का कोई स्वयं का प्रशिक्षण संस्थान न होने के कारण नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दे पाना सम्भव नहीं हो पाता था। फलस्वरूप इस हेतु अलग से बिल्डिंग बनायी गयी, जिसमें महिलाओं एवं पुरूषों के लिये अलग-अलग छात्रावास, व्याख्यान कक्ष व खेलकूद की आधुनिक व्यवस्था भी की गयी। उत्तर प्रदेश के पंचायत सामान्य निर्वाचन 2015 के बाद त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रतिनिधि निर्वाचित हो कर आये है।
भारत सरकार द्वारा प्रायोजित पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना (बैकवर्ड रीजन ग्रान्ट फन्ड) वर्ष 2007-08 से प्रदेश के 35 जनपदों में चलायी जा रही है। इस योजना के क्रियान्वयन, सुचारू रूप से संचालन से सम्बन्धित महत्वपूर्ण नीति विषयक निर्णय तथा योजनान्तर्गत जिला योजना समिति से तैयार की गयी जिला योजनाओं के अनुमोदन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च शक्ति प्राप्त समिति का शासनादेश संख्या-2832/33-3-2007-335/2006 दिनांक 28 दिसम्बर, 2007 द्वारा गठन किया गया है। उक्त शासनादेश के प्रस्तर-3 के अन्तर्गत पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि यो जना के प्रभावी नियोजन, क्रियान्वयन व अनुश्रवण तथा इसमें सन्निहित अनेकानेक गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालन के लिए प्रमुख सचिव, पंचायतीराज के अधीन परियोजना प्रबन्ध इकाई (पी0एम0यू0) का भी गठन किया गया है। वर्ष २०१२-१३ से योजना में एक नया जिला कासगंज सम्मिलित करने के कारण योजना में सम्मिलित जनपदों की संख्या ३५ हो गयी है|
योजना के प्रमुख उद्देश्य
योजना का उद्देश्य विकास कार्यों में ऐसे क्रिटिकल गैप्स को पूरा करना है जो अन्य योजनाओं से छूट गये हैं।
योजना निर्माण एवं स्वीकृति की प्रक्रिया
इस धनराशि से त्रिस्तरीय पंचायतें एवं नागर निकायें अपनी विकास योजनायें तैयार करेंगी। ग्राम पंचायतें अपनी योजनाएं समेकित करते हुए अपनी योजनाएं बनायेंगी और क्षेत्र पंचायत को भेजेंगी| क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायतों की योजनाओ को समेकित करते हुए अपनी योजना बनाएगी और इसे जिला पंचायत को भेजेगी| क्षेत्र पंचायतों की योजाओं को समेकित कर जिला पंचायत अपनी योजना बनायेगी। इस प्रकार त्रिस्तरीय पंचायतों व नागर निकायों की समे कित योजनाओं को जिला योजना समिति द्वारा अनुमोदित किया जायेगा। तत्पश्चात् धनराशि अवमुक्त करने के लिए योजनाएं भारत सरकार को भे जी जायेंगी।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के उन राजस्व ग्रामों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना है, जो विकास की आधारभूत सुविधाओं यथा सम्पर्क मार्ग, ग्रामीण विद्युतीकरण, पेयजल, स्वच्छ शौचालय आदि से वंचित है। इस योजना के अन्तर्गत चयनित ग्रामों को लाभार्थीपरक योजनों से संतृप्त कराये जाने का भी लक्ष्य है। उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु संचालित की जाने वाली यह योजना ‘‘डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना’’ के नाम से जानी जायेगी। इस योजना के अन्तर्गत चयनित राजस्व ग्राम का विकास की इकाई (Unit) माना जायेगा, जिसके अन्तर्गत उस राजस्व ग्राम की समस्त बसावटें सम्मिलित होंगी। मुख्य ग्राम को भी एक बसावट माना जाएगा।
डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना - सम्बंधित दस्तावेज
शासनादेश - डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना लागू किया जाना १७-मई -२०१२
शासनादेश - डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के अंतर्गत आतंरिक गलियों एवं नालियों के निर्माण के सम्बन्ध में मार्ग निर्देश १३-जून-२०१२
बजट - डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में अनुदान सं १४ के अंतर्गत धनराशी का आवंटन
बजट - डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में अनुदान सं ८३ के अंतर्गत धनराशी का आवंटन
बजट - डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में अनुदान सं ८३ के अंतर्गत के सी ड्रेन एवं सी सी रोड धनराशी का आवंटन
वर्ष 2013-14 मे चयनित डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्रामो का संतृप्तीकरण
डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में अनुदान सं ८३ के अंतर्गत धनराशी का आवंटन
डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में अनुदान सं १४ के अंतर्गत धनराशी का आवंटन
डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में अनुदान सं १४ के अंतर्गत धनराशी का आवंटन - 1
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-243(आई) तथा 243 (वाई) में, आयोग के गठन की दी गयी व्यवस्थानुसार राज्य वित्त आयोगों का गठन प्रत्येक पांच वर्ष पर किया जाता है। उ0प्र0 पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 32 क के प्रावधानों के अन्तर्गत महामहिम श्री राज्यपाल प्रत्येक पांच वर्ष पर पंचायती राज एंव स्थानीय निकाय हेतु एक राज्य वित्त आयोग का गठन करेंगें। चतुर्थ राज्य वित्त आयोग का गठन अधिसूचना संख्या आर0 जी0-2252/दस-11-70/09 दिनांक 23-12-2011 द्वारा श्री अतुल कुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त मुख्य सचिव के अध्यक्षता में किया गया है।
ग्राम पंचायत विकास योजना (जी.पी.डी.पी.) - “हमारी योजना हमारा विकास”
ग्राम पंचायतें स्वयं के समग्र विकास हेतु पंचवर्षीय एवं वार्षिक योजना का निर्माण करेंगी। ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार की जाने वाली ग्राम पंचायत विकास योजना सहभागी नियोजन एवं विभिन्न संसाधनों के अभिसरण (कनवर्जेन्स) पर आधारित होगी। ग्राम पंचायत विकास योजना के अन्तर्गत 14वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, मनरेगा, एन.आर.एल. एम, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायत भवन निर्माण, अंत्येष्टि स्थलों का विकास तथा ग्राम पंचायत की स्वयं की आय को सम्मिलित करते हुए उपलब्ध वित्तीय एवं मानव संसाधनों का अभिसरण (कनवर्जेन्स) किया जायेगा। प्रदेश में इस व्यवस्था का नाम ग्राम पंचायत विकास योजना “हमारी योजना हमारा विकास” है।
योजना का उद्देश्य
1. ग्राम पंचायतों का समग्र एवं समेकित विकास, जिसमें न केवल अधोसंरचनात्मक विकास बल्कि सामाजिक, आर्थिक एवं वैयक्तिक विकास भी सम्मिलित है।
2. निर्णय लेने की प्रकिया का विकेन्द्रीकरण के साथ समुदाय को निर्णय लेने हेतु सक्षम बनाना।
3. ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यकताओं का चिन्हीकरण, प्राथमिकीकरण सहयोगी नियोजन एवं संसाधनों के अभिसरण को बढ़ावा देना ।
4. ग्राम पंचायत विकास योजना में मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों यथा-निर्धनों की आजीविका, निर्धनता एवं सामाजिक सुरक्षा को प्रमुखता से सम्मिलित करते हुए अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति के कल्याण को प्राथमिकता दी जानी है।
क्रियान्वयन की प्रगति 1. शासन के पत्रांकः 1824(1)/33-3-2015-10 जी0आई0/2015 दिनांक 26 जून, 2015 के कार्यालय ज्ञाप द्वारा कृषि उत्पादन आयुक्त, उ0प्र0 शासन की अध्यक्षता में 9 सदस्यी समिति का गठन।
2. ग्राम पंचायत विकास योजना का शासनादेश तथा संलग्नक के रूप में मार्गनिर्देशिका संख्याः 2168/33-3-2015- 10जीआई/ 2015 दिनांक 29 सितम्बर, 2015 द्वारा जारी।
3. ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया को जनपद स्तर से ग्राम पंचायत तक चरणबद्ध तरीके से कराने संबंधी दिशा निर्देश संबंधी शासनादेश संख्याः 3215/33-3-2015-10 जी.आई./2015 दिनांक 11 दिसम्बर, 2015 को प्रमुख सचिव, पंचायती राज के हस्ताक्षर से जारी।
4. ग्राम पंचायत विकास योजना निर्माण हेतु प्रथम चरण में राज्य स्तर पर 6 दिवसीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण द्वारा दिनांक 21 जनवरी से 7 फरवरी, 2016 के मध्य प्रदेश के कुल 275 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया गया।
5. माह मार्च 2016 तक सभी ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों का प्रशिक्षण पूर्ण किया जाना है। 6. माह अप्रैल 2016 तक सभी ग्राम पंचायत की वार्षिक एवं पंचवर्षीय योजना बनाकर आॅनलाइन साॅफ्टवेयर प्लान प्लस पर अपलोड किया जायेगा एवं कार्यो का भौतिक एवं वित्तीय अनुश्रवण आॅनलाइन के माध्यम से किया जायेगा।
7. अतः आपसे अपेक्षा की जाती है कि सभी हितभागियों का प्रशिक्षण मार्च माह के अन्त तक एवं सभी ग्राम पंचायतों की ग्राम पंचायत विकास योजना अप्रैल माह के अन्त तक पूर्ण करा ली जाये।
उद्देश्य-
1. कम लागत पर सेनेटरी नेपकिन का बड़े पैमाने पर उत्पादन जिससे ग्रामीण महिलाओं एवं किशोरियों को उनके वित्तीय संशाधन के अनुरूप कम कीमत पर सेनेटरी नेपकिन उपलब्ध कराया जा सकें।
2. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं को रोजगार, के साधन के रूप में नेपकिन उत्पादन का प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी आय मे अधिक वृद्वि होगी।
3. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं एवं किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के प्रति जागरूक करना।
4. विद्यालयों मे किशोरावस्था में ही स्त्री वर्ग को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता प्रबंधन के संबंध में शिक्षित करना।
वित्तीय व्यवस्था
सेनेटरी नेपकिन के उत्पादन हेतु प्रथम चरण मे प्रत्येक मण्डल के एक जनपद में मशीन स्थापित कर उत्पादन करने हेतु सक्रिय पंचायत उद्योग को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से रू0 3.50 लाख अवमुक्त करने के निर्देश दिये गये है।
स्थापना एवं उत्पादन की स्थिति
प्रदेश के 43 जनपदों क्रमशः लखनऊ, गोरखपुर, बदांयू, कानपुर नगर, मेरठ, कौशाम्बी, मिर्जापुर, आगरा, बाराबंकी, महोबा, कन्नौज, फिरोजाबाद, बरेली, जालौन, वाराणसी, कासगंज, अलीगढ़, भदोही, अमेठी, सुल्तानपुर, पीलीभीत, एटा, आजमगढ़, हमीरपुर, फर्रूखाबाद, गाजियाबाद, कानपुर देहात, महाराजगंज, प्रतापगढ़, मैनपुरी, ललितपुर, सीतापुर, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, इटावा एवं फतेहपुर मे सेनेटरी नेपकिन की स्थापना कर ली गयी है। निदेशालय के पत्र दिनांक 10.09.2015 के द्वारा 9 नेपकिन पैकेट की दर रू0 20/- तथा 6 नेपकिन पैकेट की दर रू0 15/- निर्धारित कर समस्त जनपदों को अवगत करा दिया गया है। उक्त के अतिरिक्त ट्रेड मार्क की एकरूपता लाने हेतु दिशा के नाम से समस्त जनपदों मे उत्पादन करने के संबंध मे निर्देश जारी कर दिये गये है। कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संचालन हेतु निदेशक महिला कल्याण, कारागार एवं स्वास्थ्य सेवायें, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग द्वारा अपने संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों को सेनेटरी नेपकिन क्रय करने हेतु निर्देशित किया गया है।
ग्राम पंचायतों के कार्यालयों, उनकी बैठकों के आयोजन तथा ग्राम स्तर पर पंचायत सचिव की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उनके आवास की व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए पंचायत भवनों का निर्माण कराया जाता है। वर्तमान में एक पंचायत भवन की लागत रू0 17.46 लाख है। भवन में एक बैठक हाल, दो कार्यालय कक्ष, कर्मी आवास, बरामदा व शौचालय खण्ड का निर्माण होता है। निर्माण ग्राम पंचायतें स्वयं करती हैं।